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पन्नी के सहारे नेवढ़िया बिजली उपकेंद्र: बारिश आते ही 40 गांवों पर संकट

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मेजा के नेवढ़िया 33/11 केवीए बिजली उपकेंद्र में मशीनों और उपकरणों को बारिश से बचाने के लिए पन्नी का सहारा लिया जा रहा है। करीब 40 गांवों की बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से ग्रामीण परेशान हैं।

मेजा (प्रयागराज)।
बारिश शुरू होते ही बिजली व्यवस्था की पोल खुलने लगी है। मेजा तहसील क्षेत्र के नेवढ़िया स्थित 33/11 केवीए विद्युत उपकेंद्र की हालत ऐसी है कि मशीनों और विद्युत उपकरणों को बारिश से बचाने के लिए पन्नी का सहारा लेना पड़ रहा है। सवाल यह है कि जिस उपकेंद्र से करीब 40 गांवों की बिजली आपूर्ति जुड़ी है, वहां उपकरणों की सुरक्षा के लिए पक्की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?

नेवढ़िया, चपरतला, बरहा, अखरी शाहपुर समेत लगभग 40 गांवों के उपभोक्ताओं की बिजली आपूर्ति इसी उपकेंद्र पर निर्भर है। ग्रामीणों का आरोप है कि हल्की बारिश शुरू होते ही कई गांवों की बिजली काट दी जाती है और घंटों आपूर्ति ठप रहती है। उमस भरी गर्मी में घरेलू उपभोक्ताओं के साथ किसान और छोटे कारोबारी भी परेशान होते हैं।

पन्नी बनी सुरक्षा कवच, विभागीय व्यवस्था पर सवाल

उपकेंद्र में मशीनों और विद्युत उपकरणों को बारिश से बचाने के लिए पन्नी का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह तस्वीर सिर्फ एक उपकेंद्र की बदहाली नहीं, बल्कि बिजली व्यवस्था के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि उपकरणों की सुरक्षा के लिए पन्नी ही एकमात्र सहारा है तो तेज बारिश, हवा और जलभराव की स्थिति में इनकी सुरक्षा कितनी सुनिश्चित है?

उपकरणों में खराबी आने पर इसका सीधा असर उन करीब 40 गांवों के हजारों उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है, जिनकी बिजली आपूर्ति इस उपकेंद्र से होती है।

मेजारोड उपकेंद्र भी जलभराव की जद में

बारिश के मौसम में मेजारोड विद्युत उपकेंद्र की स्थिति भी चिंता बढ़ाती है। ग्रामीणों के मुताबिक लगातार बारिश होने पर उपकेंद्र के आसपास जलभराव का खतरा बना रहता है। स्थायी जलनिकासी व्यवस्था नहीं होने से हर साल कर्मचारियों और उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

बारिश में कटौती—व्यवस्था की मजबूरी या लापरवाही?

बारिश के दौरान बिजली कटौती सुरक्षा कारणों से जरूरी हो सकती है, लेकिन सवाल यह है कि क्या हर बारिश में आपूर्ति बाधित होना स्थायी समाधान है? अगर उपकेंद्र और उपकरणों को मौसम के अनुरूप सुरक्षित बनाया जाए तो बार-बार बिजली काटने की जरूरत कितनी रह जाएगी?

ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के अधिकारियों से नेवढ़िया उपकेंद्र की स्थायी मरम्मत एवं सुरक्षा व्यवस्था, मशीनों को सुरक्षित रखने के लिए पक्के इंतजाम, मेजारोड उपकेंद्र में जलनिकासी की व्यवस्था और बारिश के दौरान अनावश्यक बिजली कटौती पर रोक लगाने की मांग की है।

UPPCL MEDIA का सवाल:
जब करीब 40 गांवों की बिजली आपूर्ति एक उपकेंद्र पर निर्भर है, तो वहां मशीनों की सुरक्षा के लिए पन्नी का सहारा क्यों? क्या विभाग किसी बड़े हादसे या उपकरणों के फेल होने का इंतजार कर रहा है?

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खबर प्रकाशित

21 Aug, 10:45 am

मेजा के नेवढ़िया 33/11 केवीए बिजली उपकेंद्र में मशीनों और उपकरणों को बारिश से बचाने के लिए पन्नी का सहारा लिया...

आगे की रिपोर्ट आने पर यहीं जुड़ेगी। अभी समाधान की पुष्टि नहीं हुई है।

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