UPPCL MEDIA | विशेष पड़ताल रिपोर्ट
झांसी के नोटा गांव में 25 KVA ट्रांसफार्मर और PTW कनेक्शन पर गंभीर सवाल। ₹5 लाख लेने का आरोप, ट्रांसफार्मर दोबारा लगाने के दावे और विभागीय जांच की मांग। पढ़ें UPPCL Media की विशेष पड़ताल।
# हाई लाइन लॉस फीडर पर बिजली विभाग की कार्यप्रणाली कटघरे में; ट्रांसफार्मर हटाने के बाद दोबारा लगाए जाने का दावा, जांच और एफआईआर पर गंभीर सवाल
झांसी/मऊरानीपुर। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अंतर्गत जनपद झांसी के तहसील टहरौली, विद्युत वितरण खंड मऊरानीपुर स्थित 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र टहरौली से पोषित विजना फीडर से जुड़े नोटा गांव में कथित फर्जी विद्युत संयोजन और 25 केवीए ट्रांसफार्मर लगाने का मामला बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड की घोषित हाई लाइन लॉस फीडर सूची में दर्ज इस फीडर पर यदि दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ कर विद्युत संयोजन स्वीकृत कराने और ट्रांसफार्मर स्थापित करने की पुष्टि होती है, तो यह केवल राजस्व हानि का मामला नहीं, बल्कि विभागीय निगरानी और विद्युत सुरक्षा व्यवस्था की भी बड़ी विफलता होगी।

यूपीपीसीएल मीडिया की पड़ताल में सामने आए दस्तावेजों, उपलब्ध तस्वीरों और संबंधित पक्षों से प्राप्त जानकारी के आधार पर कई ऐसे बिंदु सामने आए हैं, जिनकी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच आवश्यक है। आरोप है कि गांव में संविदा कुशल लाइनमैन चंद्रशेखर पटेल पिछले तीन वर्षों से अधिक समय से 25 केवीए ट्रांसफार्मर वाले निजी नलकूप (PTW) संयोजन को चलवा रहे थे। इस दौरान कथित अनियमितताओं पर विभागीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई, यह बड़ा सवाल है।
विद्युत लाइन विस्तार के दौरान पकड़ा गया कथित फर्जी ट्रांसफार्मर
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विद्युत लाइन विस्तार योजना के कार्य के दौरान तत्कालीन अवर अभियंता सी.वी. राय की नजर नोटा गांव में स्थापित उक्त ट्रांसफार्मर पर पड़ी। आरोप है कि ट्रांसफार्मर की स्थापना और उससे संबंधित दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताएं थीं। ट्रांसफार्मर की स्थापना का तरीका भी कथित रूप से ऐसा था, जिससे विद्युत सुरक्षा मानकों के पालन पर सवाल उठते हैं।

मामला सामने आने के बाद तत्कालीन अवर अभियंता द्वारा डिवीजन स्तर पर बनाए गए व्हाट्सऐप समूह में इसकी सूचना साझा किए जाने की बात कही जा रही है। आरोप है कि समूह में सूचना साझा होने के लगभग आधे घंटे के भीतर ट्रांसफार्मर को मौके से हटा दिया गया।
यदि ऐसा हुआ, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर ट्रांसफार्मर हटाने की इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई? क्या मौके पर उसकी वैधता, स्वीकृत भार, तकनीकी स्वीकृति और भुगतान संबंधी अभिलेखों की जांच की गई थी? क्या इस कार्रवाई का कोई विधिवत निरीक्षण प्रतिवेदन तैयार हुआ?
इन प्रश्नों का उत्तर संबंधित विभागीय अभिलेखों और मौके की निष्पक्ष जांच से ही मिल सकता है।
चार्ज परिवर्तन के बाद उसी स्थान पर ट्रांसफार्मर लौटने का आरोप
इस प्रकरण में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ट्रांसफार्मर संबंधी शिकायत सामने आने के बाद संबंधित विद्युत उपकेंद्र के चार्ज में बदलाव किया गया और अवर अभियंता ईश्वर देव मिश्र को जिम्मेदारी सौंपी गई।
आरोप है कि चार्ज परिवर्तन के बाद वही ट्रांसफार्मर पुनः उसी स्थान पर स्थापित कर दिया गया और उससे विद्युत आपूर्ति भी शुरू हो गई। खबर लिखे जाने तक ट्रांसफार्मर के दोबारा स्थापित होने तथा उससे आपूर्ति जारी रहने का दावा किया गया है।
यदि यह दावा सही है, तो विभागीय स्तर पर पहले हटाए गए ट्रांसफार्मर को दोबारा लगाने की अनुमति किसने दी? क्या इसके लिए नया निरीक्षण, तकनीकी परीक्षण, स्वीकृति और वैध संयोजन से संबंधित अभिलेख तैयार किए गए? क्या पहले उठाई गई आपत्तियों का निस्तारण किया गया था?
इन सवालों की अनदेखी करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं होगा।
दस्तावेजों में बड़ा अंतर: स्वीकृत संयोजन या कागजों पर तैयार व्यवस्था?
इस मामले में उपलब्ध अभिलेखों का मिलान सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। प्रस्तुत दस्तावेजों में अलग-अलग तारीखों और राशियों का उल्लेख है, जिनकी जांच किए बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
1. निजी नलकूप संयोजन संबंधी पत्र
अधिशासी अभियंता, विद्युत वितरण खंड मऊरानीपुर के कार्यालय से जारी पत्र संख्या 611, दिनांक 30 सितंबर 2023 में श्रीमती रामकली पत्नी वीरेंद्र सिंह, निवासी ग्राम नोटा, के नाम निजी नलकूप संयोजन का उल्लेख है। पत्र में आवेदन संख्या 1008322118 और 8 अश्वशक्ति (HP) के संयोजन का संदर्भ दिया गया है।
पत्र के अनुसार, पांच मदों में कुल ₹1,22,763 जमा करने का विवरण है। इनमें सर्विस लाइन एवं 25 केवीए परिवर्तक का चार्ज, मीटर चार्ज, मीटर केबल चार्ज, सर्विस लाइन चार्ज और जमानत राशि शामिल हैं।
2. टैक्स इनवॉइस
उपलब्ध टैक्स इनवॉइस पर दिनांक 4 अक्टूबर 2023 तथा ₹1,22,763 की राशि अंकित है। इस दस्तावेज में भी रामकली के नाम और संबंधित आवेदन का उल्लेख दिखाई देता है।
3. विद्युत लाइन एवं ट्रांसफार्मर का अनुमान
एक अन्य अनुमान पत्र में 8 HP के निजी नलकूप संयोजन के लिए 11 केवी लाइन विस्तार, 25 केवीए ट्रांसफार्मर और संबंधित सामग्री का विवरण दर्ज है। इसमें 11 केवी लाइन के लगभग 84 मीटर विस्तार तथा अन्य तकनीकी मदों का उल्लेख है। अनुमान पत्र में कुल लागत, मीटरिंग व्यवस्था और जीएसटी सहित राशि का विवरण भी दिखाई देता है।
इन दस्तावेजों के आधार पर यह स्वतः सिद्ध नहीं होता कि संयोजन फर्जी था। लेकिन यदि आरोप है कि मौके पर स्थापित ट्रांसफार्मर इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर वैध दिखाया गया, जबकि स्वीकृति, भुगतान, स्थापना या सामग्री निर्गमन में अनियमितता हुई, तो विभाग को मूल अभिलेखों के आधार पर इसका सत्यापन करना चाहिए।
पांच लाख रुपये लेने का आरोप, उपभोक्ता ने लाइनमैन पर लगाया दावा
इस प्रकरण में सबसे गंभीर आरोप कथित उपभोक्ता की ओर से सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सूत्रों की माने, तो उपभोक्ता ने दावा किया कि संविदा लाइनमैन चंद्रशेखर पटेल ने ट्रांसफार्मर लगवाने के लिए ₹5 लाख लिए थे और कुछ दस्तावेज उपलब्ध कराए थे। उपभोक्ता का कथित तौर पर यह भी कहना है कि उसे जानकारी नहीं थी कि ट्रांसफार्मर या उससे संबंधित दस्तावेजों में कोई अनियमितता है।
यह आरोप अत्यंत गंभीर है। हालांकि, ₹5 लाख के लेन-देन की स्वतंत्र पुष्टि, भुगतान का प्रमाण, संबंधित दस्तावेज और दोनों पक्षों के बयान सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराए बिना इसे सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता, हाॅलाकि यूपीपीसीएल मीडिया इसकी पुष्टि नहीं करता। इसकी जांच कराई जानी चाहिए कि रकम किस माध्यम से दी गई, किस उद्देश्य से ली गई और क्या इसका विभागीय प्रक्रिया से कोई संबंध था।
यदि किसी कर्मचारी या संविदाकर्मी ने अनधिकृत रूप से धन लेकर विद्युत संयोजन अथवा ट्रांसफार्मर लगवाने का काम किया है, तो यह विभागीय और कानूनी जांच का विषय है।
खुलासा करने वाले अवर अभियंता को हटाया, लेकिन मूल मामले की जांच कहां?
उपलब्ध जानकारी में यह भी आरोप है कि ट्रांसफार्मर की अनियमितता उजागर करने वाले तत्कालीन अवर अभियंता सी.वी. राय को संबंधित विद्युत उपकेंद्र के चार्ज से हटा दिया गया और बाद में दूसरे अवर अभियंता को जिम्मेदारी सौंप दी गई।

यहां महत्वपूर्ण सवाल केवल चार्ज परिवर्तन का नहीं, बल्कि उसके समय और परिस्थितियों का है। क्या यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किया गया था या कथित अनियमितता उजागर होने के बाद? क्या चार्ज परिवर्तन के आदेश में कारण दर्ज हैं? क्या मामले की जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका का परीक्षण किया गया?
उपलब्ध आदेश की प्रमाणित प्रति, अनुमोदन की तारीख और फाइल नोटिंग की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रशासनिक निर्णय सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा था या किसी अन्य कारण से लिया गया।
मुख्य अभियंता से लेकर खंड स्तर तक जानकारी होने का दावा, फिर कार्रवाई क्यों नहीं?
इस प्रकरण की जानकारी मुख्य अभियंता झांसी, अधीक्षण अभियंता (ग्रामीण), अधिशासी अभियंता मऊरानीपुर और उपखंड अधिकारी प्रवीण कुमार राम तक पहुंचने का दावा किया गया है। इसके बावजूद खबर लिखे जाने तक न तो मौके का निर्णायक निरीक्षण होने की पुष्टि सामने आई है और न ही कथित फर्जी संयोजन के संबंध में प्राथमिकी दर्ज होने का कोई प्रमाण उपलब्ध कराया गया है।

यदि वरिष्ठ अधिकारियों को इस मामले की लिखित सूचना मिली थी, तो उस पर की गई कार्रवाई का विवरण सामने आना चाहिए। क्या जांच समिति गठित की गई? क्या ट्रांसफार्मर की वैधता और संयोजन के अभिलेखों का सत्यापन हुआ? क्या विद्युत सुरक्षा के मानकों की जांच की गई? क्या कथित वित्तीय लेन-देन की जांच के लिए कोई कदम उठाया गया?
यदि सूचना मिलने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही का प्रश्न है। और यदि कार्रवाई हुई है, तो विभाग को उसका तथ्यात्मक विवरण सार्वजनिक करना चाहिए।
हाई लाइन लॉस फीडर पर यह मामला और भी महत्वपूर्ण
विजना फीडर का हाई लाइन लॉस फीडर की सूची में शामिल होना इस मामले को और संवेदनशील बनाता है। ऐसे फीडरों पर विद्युत हानि, अनधिकृत उपयोग, बकाया वसूली और वैध संयोजनों की जांच विशेष महत्व रखती है।
यदि किसी संयोजन में अनियमितता हुई है, तो उससे संभावित राजस्व हानि का आकलन किया जाना चाहिए। साथ ही यह भी जांचना होगा कि संबंधित संयोजन पर स्वीकृत भार कितना था, वास्तव में कितना भार इस्तेमाल किया जा रहा था, मीटरिंग व्यवस्था वैध थी या नहीं और विद्युत आपूर्ति किस आधार पर जारी रखी गई।
सिर्फ ट्रांसफार्मर हटाना या किसी कर्मचारी का चार्ज बदलना पर्याप्त नहीं है। मूल अभिलेखों, स्थल निरीक्षण, मीटर रीडिंग, भुगतान विवरण और सामग्री निर्गमन रजिस्टर का मिलान आवश्यक है।
विद्युत सुरक्षा पर भी उठते हैं सवाल
ट्रांसफार्मर की स्थापना के तरीके को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि मौके पर सुरक्षा मानकों का उचित पालन नहीं किया गया था। यदि ट्रांसफार्मर असुरक्षित तरीके से स्थापित था, तो इससे कर्मचारियों, ग्रामीणों और आसपास से गुजरने वाले लोगों के लिए खतरा पैदा हो सकता था।
इस पहलू पर तकनीकी अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि ट्रांसफार्मर की स्थापना निर्धारित मानकों के अनुरूप थी या नहीं। यदि सुरक्षा में कमी पाई जाती है, तो आपूर्ति को सुरक्षित बनाने और जिम्मेदारी निर्धारित करने के लिए तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।
यूपीपीसीएल मीडिया के सवाल
1. क्या आवेदन संख्या 1008322118 के तहत जारी निजी नलकूप संयोजन की स्वीकृति, भुगतान और स्थापना का मूल रिकॉर्ड उपलब्ध है?
2. क्या मौके पर लगा 25 केवीए ट्रांसफार्मर उसी स्वीकृत अनुमान और सामग्री निर्गमन के अनुरूप है?
3. ट्रांसफार्मर हटाए जाने और दोबारा स्थापित किए जाने की तारीखों का आधिकारिक रिकॉर्ड क्या है?
4. कथित ₹5 लाख के लेन-देन की जांच के लिए कोई शिकायत, बयान या वित्तीय साक्ष्य प्राप्त हुआ है?
5. क्या ट्रांसफार्मर की तकनीकी सुरक्षा और मीटरिंग व्यवस्था का स्वतंत्र निरीक्षण कराया गया?
6. क्या मामले में किसी अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी निर्धारित की गई है? यदि हां, तो क्या कार्रवाई हुई?
7. यदि संयोजन वैध है, तो विभाग दस्तावेजों के आधार पर इसकी पुष्टि करे; यदि अनियमितता है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों पर नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
जांच हो, रिकॉर्ड सामने आए और जवाबदेही तय हो
नोटा गांव का यह प्रकरण केवल एक ट्रांसफार्मर तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यदि उपलब्ध दस्तावेजों और आरोपों की जांच में अनियमितता प्रमाणित होती है, तो संबंधित संयोजन, तकनीकी स्वीकृति, भुगतान, सामग्री निर्गमन और विभागीय भूमिका की पूरी कड़ी की जांच आवश्यक होगी।
यूपीपीसीएल मीडिया मांग करता है कि दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के सक्षम अधिकारी मामले का निष्पक्ष स्थलीय निरीक्षण कराएं, सभी मूल अभिलेखों का मिलान करें, विद्युत सुरक्षा की जांच करें और कथित वित्तीय लेन-देन की स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करें। अनियमितता प्रमाणित होने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।
सबसे बड़ा सवाल यही है—यदि ट्रांसफार्मर वैध था, तो उसे हटाने और दोबारा लगाने की परिस्थितियां क्या थीं? और यदि वह अवैध था, तो उससे विद्युत आपूर्ति जारी रहने की जिम्मेदारी किसकी है?
इन सवालों का जवाब आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच, प्रमाणित दस्तावेजों और जवाबदेह कार्रवाई से मिलना चाहिए।
यूपीपीसीएल मीडिया इस मामले में संबंधित अधिकारियों और आरोपित पक्षों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।
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खबर प्रकाशित
25 Oct, 09:59 pmUPPCL MEDIA | विशेष पड़ताल रिपोर्ट झांसी के नोटा गांव में 25 KVA ट्रांसफार्मर और PTW कनेक्शन पर गंभीर सवाल।...
आगे की रिपोर्ट आने पर यहीं जुड़ेगी। अभी समाधान की पुष्टि नहीं हुई है।
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