असोथर के सराय खालिस में बिजली विभाग की ‘मुस्तैदी’ की खुली पोल, शिकायतों के बावजूद नहीं हटा खतरनाक पोल
फतेहपुर। बिजली विभाग की लापरवाही का इससे बड़ा उदाहरण और क्या होगा कि एक टूटा बिजली का खंभा पिछले चार महीने से मकान की दीवार के सहारे टिका है और जिम्मेदार विभाग अब भी ‘जांच’ और ‘कार्रवाई’ के भरोसे बैठा है।
मामला असोथर विकासखंड के सराय खालिस गांव का है, जहां संजय मौर्य के घर की दीवार पर आंधी में टूटकर गिरा बिजली का पोल आज भी उसी तरह खतरनाक स्थिति में पड़ा है। पोल गिरने से दीवार को नुकसान भी हुआ, लेकिन इसके बावजूद विभाग ने न तो पोल हटाया और न ही नया खंभा लगाया।
तस्वीर साफ है, फिर जांच किस बात की?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब टूटा हुआ पोल मौके पर साफ दिखाई दे रहा है, उसकी स्थिति किसी से छिपी नहीं है और ग्रामीण कई बार शिकायत कर चुके हैं, तो फिर विभाग को कार्रवाई के लिए और कितनी जांच चाहिए?
क्या विभागीय अधिकारी इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि पोल किसी व्यक्ति, बच्चे या राहगीर के ऊपर गिरे और उसके बाद पंचनामा बनाकर जिम्मेदारी तय की जाए?
यूपीपीसीएल मीडिया का सीधा सवाल है—क्या बिजली विभाग की कार्यप्रणाली में ‘हादसा होने के बाद कार्रवाई’ ही मानक बन चुका है?
चार महीने तक लाइनमैन की नजर नहीं पड़ी या नजरअंदाज किया गया?
विभाग के पास क्षेत्रवार कर्मचारियों और लाइनमैन की व्यवस्था होती है। बिजली लाइनों, पोलों और नेटवर्क की स्थिति पर नजर रखना उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा है।
फिर सवाल उठता है कि चार महीने तक इस गांव में विभागीय कर्मचारी पहुंचे ही नहीं या पहुंचने के बावजूद इस खतरनाक पोल को नजरअंदाज कर दिया गया?
यदि नियमित पेट्रोलिंग होती है तो यह पोल नजर क्यों नहीं आया?
और यदि पोल नजर आया था, तो उसे तत्काल सुरक्षित क्यों नहीं कराया गया?
आखिर फील्ड में विभाग की निगरानी व्यवस्था है कहां?
क्या क्षेत्र में बिजली चोरी भी ‘अदृश्य’ है?
यह मामला विभाग की एक और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी पर सवाल खड़ा करता है। बिजली विभाग के कर्मचारी क्षेत्र में भ्रमण करते हैं तो उन्हें जर्जर पोल और तारों के साथ-साथ बिजली चोरी, अवैध कनेक्शन और अनधिकृत उपयोग पर भी नजर रखनी होती है।
लेकिन जब एक टूटा हुआ बिजली का पोल चार महीने तक विभागीय नजरों से बचा रह सकता है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या क्षेत्र में बिजली चोरी की जांच भी इसी स्तर की निगरानी से होती है?
क्या संबंधित क्षेत्र में नियमित निरीक्षण किया गया?
क्या विभाग के पास इस क्षेत्र की हालिया पेट्रोलिंग या निरीक्षण का कोई रिकॉर्ड है?
अगर रिकॉर्ड है तो उसमें इस खतरनाक पोल का उल्लेख क्यों नहीं? और अगर उल्लेख नहीं है तो निरीक्षण हुआ ही कैसे?
जिस मकान की दीवार पर पोल टिका है, उसकी भी जिम्मेदारी पर सवाल
यह भी जांच का विषय है कि जिस मकान की दीवार से पोल टिका हुआ है, वहां रहने वाले लोगों ने विभाग को इसकी सूचना कब दी और किस स्तर पर शिकायत दर्ज कराई।
यदि मकान मालिक या ग्रामीणों ने सूचना नहीं दी तो यह भी सवाल है कि क्या विभाग केवल शिकायत मिलने के बाद ही अपनी आंखें खोलता है?
बिजली विभाग का काम सिर्फ बिल भेजना नहीं, बल्कि सुरक्षित विद्युत व्यवस्था बनाए रखना भी है।
जेई ने भरोसा दिया, लेकिन कार्रवाई कब?
मामले में जूनियर इंजीनियर कमल किशोर ने जांच के बाद टूटे पोल को बदलवाने की कार्रवाई का भरोसा दिया है।
लेकिन ग्रामीणों का सवाल बेहद सीधा है—
चार महीने पहले टूटे पोल के लिए अब जांच और भरोसे की जरूरत क्यों पड़ी?
क्या चार महीने का समय किसी बड़े हादसे की कीमत चुकाने के लिए पर्याप्त नहीं है?
ग्रामीणों को आश्वासन नहीं, सुरक्षित पोल और तत्काल कार्रवाई चाहिए।
हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन होगा?
आज पोल दीवार पर टिका है। कल तेज हवा चली तो यह जमीन पर गिर सकता है। उसके साथ बिजली के तार गिरे तो स्थिति और भयावह हो सकती है।
ऐसे में यदि कोई हादसा होता है तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
मकान मालिक की? ग्रामीणों की? लाइनमैन की? जेई की? या उस पूरी विभागीय व्यवस्था की, जिसने चार महीने तक एक खुले खतरे को खत्म नहीं किया?
यही वह सवाल है जिसका जवाब बिजली विभाग को देना चाहिए।
यूपीपीसीएल मीडिया की पड़ताल में सबसे बड़ा सवाल
एक टूटा बिजली का पोल चार महीने से सबको दिखाई दे रहा है, ग्रामीण शिकायत कर रहे हैं, तस्वीरें स्थिति की गंभीरता बता रही हैं—फिर भी कार्रवाई के बजाय ‘जांच’ का इंतजार क्यों?
क्या विभागीय अधिकारियों को खंभा गिरने का इंतजार है या किसी इंसान के घायल होने का?
यूपीपीसीएल मीडिया की मांग है कि पोल को तत्काल हटाया जाए, नया पोल लगाया जाए और साथ ही यह भी जांच हो कि चार महीने तक विभागीय निरीक्षण व्यवस्था इस खतरे को क्यों नहीं पकड़ सकी।
क्योंकि सवाल सिर्फ एक पोल का नहीं है—सवाल यह है कि बिजली विभाग की जिम्मेदारी आखिर शुरू कहां होती है और खत्म कहां?
यदि कोई खबर शिकायत से संबंधित है तो, अभी तक का अपडेट
खबर प्रकाशित
8 Sep, 10:04 amअसोथर के सराय खालिस में बिजली विभाग की ‘मुस्तैदी’ की खुली पोल, शिकायतों के बावजूद नहीं हटा खतरनाक...
आगे की रिपोर्ट आने पर यहीं जुड़ेगी। अभी समाधान की पुष्टि नहीं हुई है।
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