🔴 UPPCL MEDIA की विशेष पड़ताल
छतारी बिजलीघर में बकाये और नए कनेक्शनों का मामला: संविदाकर्मी से लेकर मुख्य अभियंता तक, किसकी क्या जिम्मेदारी?
# मुख्य अभियंता आखिर खामोश क्यों? पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में जवाबदेही तय होगी या उपभोक्ताओं के बकाये का बोझ विभाग उठाता रहेगा?
पुराने खातों पर लाखों का बकाया, दूसरे नामों से नए कनेक्शन जारी होने के आरोप और वर्षों से एक ही उपकेंद्र पर तैनाती के सवाल—अब जांच केवल लाइनमैन तक सीमित क्यों रहे? कनेक्शन स्वीकृत करने वाले अधिकारी, राजस्व वसूली तंत्र और मुख्य अभियंता की निगरानी व्यवस्था भी जांच के दायरे में आए।
बुलंदशहर | डिबाई डिवीजन | छतारी टाउन उपकेंद्र | UPPCL MEDIA विशेष रिपोर्ट
पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL), मेरठ के अंतर्गत बुलंदशहर जनपद के डिबाई डिवीजन स्थित 33/11 केवी छतारी टाउन उपकेंद्र से संबंधित बिजली बिल बकाये और नए कनेक्शनों का मामला केवल उपभोक्ताओं की बकाया राशि तक सीमित नहीं है। शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरण में पुराने खातों पर भारी बकाया, कथित रूप से संबंधित परिवारों या परिसरों के अन्य नामों पर नए कनेक्शन, संविदाकर्मियों की लंबे समय से एक ही उपकेंद्र पर तैनाती और विभागीय निगरानी को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और विभागीय रिकॉर्ड का सत्यापन अभी आवश्यक है। फिर भी, शिकायत में दर्ज खाता संख्याओं, बकाया राशि और कनेक्शन विवरण के आधार पर एक महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आता है—यदि पुराने बिजली खातों पर बकाया लंबित था, तो नए कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया में किस-किस स्तर पर जांच हुई और उसकी जिम्मेदारी किस अधिकारी की थी?
इस पूरे प्रकरण में संविदाकर्मियों, कनेक्शन प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों, अवर अभियंता, उपखंड अधिकारी, अधिशासी अभियंता, राजस्व विभाग और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका अलग-अलग स्तर पर जांचे जाने की आवश्यकता है।
1. संविदाकर्मी लाइनमैन की भूमिका: जिम्मेदारी कहां तक, अधिकार कहां तक?
शिकायत में संविदाकर्मी लाइनमैन कुंवर हरेंद्र सिंह और शाहिद खां का नाम सामने आया है। दोनों के संबंध में पुराने बकाये वाले खातों के बावजूद अन्य नामों पर नए कनेक्शन जारी होने और लंबे समय से एक ही उपकेंद्र पर तैनाती को लेकर आरोप लगाए गए हैं।
हालांकि, किसी संविदाकर्मी की वास्तविक जिम्मेदारी उसके नियुक्ति आदेश, अनुबंध, कार्य आवंटन और विभागीय निर्देशों से निर्धारित होगी। सामान्यतः लाइनमैन का कार्य बिजली लाइन, कनेक्शन से संबंधित अधिकृत तकनीकी कार्य, सुरक्षा मानकों का पालन और अपने वरिष्ठ अधिकारियों को अनियमितता की जानकारी देना हो सकता है। लेकिन केवल लाइनमैन होने के आधार पर उसे नए कनेक्शन की स्वीकृति देने या पुराने बकाये को माफ करने का अधिकार मान लेना उचित नहीं होगा।
इसलिए जांच में चार महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान देना चाहिए:
- क्या संबंधित लाइनमैन ने नए कनेक्शन के लिए कोई आवेदन, तकनीकी रिपोर्ट या स्थल निरीक्षण रिपोर्ट तैयार की थी?
- क्या उसने पुराने कनेक्शन, बकाये या परिसर से संबंधित किसी तथ्य को जानबूझकर छिपाया अथवा गलत जानकारी दी?
- क्या नए कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया में उसकी कोई औपचारिक या अनौपचारिक भूमिका थी?
- क्या संबंधित कर्मचारी ने अपने निर्धारित कार्यक्षेत्र से बाहर जाकर किसी उपभोक्ता को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास किया?
यदि रिकॉर्ड से किसी कर्मचारी की भूमिका प्रमाणित होती है, तो उसके विरुद्ध लागू सेवा शर्तों और अनुबंध के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन केवल आरोप के आधार पर सेवा समाप्त करना उचित नहीं होगा। पहले निष्पक्ष जांच, संबंधित कर्मचारी का पक्ष और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण आवश्यक है।
सवाल यह है कि क्या विभाग ने केवल यह जांचा कि लाइनमैन कहां तैनात था, या यह भी जांचा कि संबंधित कनेक्शनों की प्रक्रिया में उसकी वास्तविक भूमिका क्या थी?
कुंवर हरेंद्र सिंह प्रकरण: पुराने बकाये और नए कनेक्शनों की जांच
शिकायतकर्ता के अनुसार, सोदान सिंह के नाम पुराने कनेक्शन संख्या 2818905000 पर ₹1,64,917 बकाया है। इसी मामले में बिजली चोरी से संबंधित कार्रवाई और ₹86,136 के डिमांड नोटिस का भी उल्लेख किया गया है।
शिकायत में राजकुमारी के नाम कनेक्शन संख्या 0139945000, नलकूप कनेक्शन संख्या 7776457778 और डॉली रानी के नाम कनेक्शन संख्या 0605219083 का भी जिक्र है। इसके अतिरिक्त, सुषमा देवी के नाम पुराने कनेक्शन संख्या 4480158068 पर ₹92,444 बकाया होने का दावा किया गया है।
इन विवरणों से अपने-आप यह सिद्ध नहीं होता कि सभी नए कनेक्शन नियमों के विरुद्ध जारी किए गए। विभाग को यह पता लगाना होगा कि:
- पुराने और नए कनेक्शन एक ही परिसर से संबंधित हैं या अलग-अलग परिसरों से।
- पुराने कनेक्शन की स्थिति क्या थी—चालू, विच्छेदित, स्थायी रूप से बंद या किसी अन्य श्रेणी में।
- नए कनेक्शन किस तारीख को, किस आवेदन के आधार पर और किस अधिकारी की स्वीकृति से जारी किए गए।
- पुराने बकाये के संबंध में लागू नियमों के अनुसार क्या जांच और कार्रवाई की गई।
- संबंधित संविदाकर्मी ने कनेक्शन जारी करने में कोई भूमिका निभाई थी या नहीं।
यदि नियमों की अनदेखी पाई जाती है, तो केवल नए कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ता की जांच पर्याप्त नहीं होगी। प्रक्रिया में शामिल प्रत्येक जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका का परीक्षण करना होगा।
शाहिद खां प्रकरण: ₹2 लाख से अधिक के कथित बकाये पर सवाल
शिकायत में नफीस खान के पुराने खाता संख्या 2745480925 पर ₹2,43,899 बकाया होने का एक विवरण दिया गया है। शिकायत के दूसरे हिस्से में इसी खाते के लिए ₹1,99,611 की राशि भी लिखी गई है। विपिन कुमार के नाम कनेक्शन संख्या 3345171148 जारी होने की बात भी कही गई है।
यहां सबसे पहले विभागीय बिलिंग लेजर से वास्तविक बकाये की पुष्टि होनी चाहिए। इसके बाद यह जांच आवश्यक है कि पुराने और नए कनेक्शन का परिसर, उपभोक्ता और स्वामित्व संबंध क्या है तथा आवेदन किस प्रक्रिया से स्वीकृत हुआ।
शिकायतकर्ता ने शाहिद खां के स्थानांतरण और पुनः छतारी तैनाती का विवरण भी दिया है। उनके संबंध में पहले सोशल मीडिया पर एक कथित वीडियो प्रसारित होने का दावा किया गया है। यदि ये विषय जांच के लिए प्रासंगिक हैं, तो संबंधित आदेशों और मूल रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाना चाहिए। किसी वीडियो या स्थानांतरण के आधार पर अपने-आप कदाचार सिद्ध नहीं होता।
मुख्य प्रश्न यह है कि नए कनेक्शन की स्वीकृति में किसकी क्या भूमिका थी और पुराने बकाये की वसूली के लिए विभाग ने क्या कदम उठाए?
पुराने कनेक्शनों के बकाये और नए खातों का पूरा विवरण
शिकायत में उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार निम्न मामलों की जांच अपेक्षित है। ये आंकड़े शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित हैं; विभागीय बिलिंग रिकॉर्ड से इनका सत्यापन अभी आवश्यक है।
क्रम| पुराना उपभोक्ता/खाता| पुराना बकाया| नया उपभोक्ता/खाता| नया बकाया
1| सोदान सिंह — 2818905000| ₹1,64,917| राजकुमारी — 0139945000| सत्यापन शेष
2| नफीस खान — 2745480925| ₹2,43,899*| विपिन कुमार — 3345171148| सत्यापन शेष
3| डोरी लाल — 4586782017| ₹1,11,640| रुक्मेश — 8398540504| ₹0
4| मुन्नी देवी — 1831104000| ₹77,786| नया खाता 2865286571| ₹2,413
5| अशोक कुमार — 3603576458| ₹1,10,886| कमलेश देवी — 9648114812| ₹4,914
6| खेम सिंह — 9549404000| ₹56,819| कुंती देवी — 4434909400| ₹5,658
7| धर्मपाल सिंह — 9538201924| ₹1,21,222| गुलवीर — 3963763618| बकाया जमा बताया गया
8| नारायण सिंह — 1049504000| ₹42,077| सुधा देवी — 8871843465| बकाया जमा बताया गया
9| खुशद्दी — 2927425000| ₹1,71,070| नौसेखा — 5268144867| बकाया जमा बताया गया
10| यूनुस खान — 4210284000| ₹53,021| यूनुस खान — 6209653100| ₹8,834
11| संजय — 5514690786| ₹44,174| रेखा देवी — 3857823543| ₹1,799
12| माया देवी — 6098705000| ₹1,71,804| मनोज देवी — 2621429844| ₹292
13| मुन्ना लाल — 2259093000| ₹67,633| आरिफ — 0545349083| सत्यापन शेष
14| भूरा — 6199783000| ₹74,619| आरिफ — 0545349083| सत्यापन शेष
15| अमन अली — 7968205000| ₹43,361| आसमा — 3584552380| सत्यापन शेष
16| विक्रम सिंह — 0191684000| ₹1,55,094| इमला देवी — 5063870012| सत्यापन शेष
17| बादरी प्रसाद — 1670939054| ₹73,427| विवेक कुमार — 0625997748| सत्यापन शेष
18| बसंती देवी — 9636466458| ₹56,746| कुंवर विशाल सिंह — 3411895828| सत्यापन शेष
*नफीस खान के बकाये की राशि शिकायत के अलग-अलग हिस्सों में ₹2,43,899 और ₹1,99,611 बताई गई है। विभागीय लेजर से सही रकम की पुष्टि आवश्यक है।
महत्वपूर्ण: उपर्युक्त सूची में कुछ नए कनेक्शनों के नाम, पते और पुराने-नए खातों के बीच संबंधों का सत्यापन शेष है। राजकुमारी के नलकूप कनेक्शन सहित अतिरिक्त कनेक्शन भी शिकायत में बताए गए हैं। इसलिए इस सूची को अंतिम विभागीय निष्कर्ष नहीं, बल्कि जांच के लिए प्रस्तुत शिकायत विवरण माना जाना चाहिए।
अवर अभियंता (JE) की जिम्मेदारी: तकनीकी सत्यापन और अभिलेखों की जांच
नए बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया में अवर अभियंता की भूमिका लागू नियमों और स्थानीय कार्य आवंटन के अनुसार महत्वपूर्ण हो सकती है। विशेषकर जहां स्थल निरीक्षण, विद्युत भार, तकनीकी व्यवहार्यता, मीटर लगाने और कनेक्शन की वास्तविक स्थिति का परीक्षण अपेक्षित हो।
इस प्रकरण में संबंधित अवर अभियंता से निम्न बिंदुओं पर रिकॉर्ड मांगा जाना चाहिए:
- पुराने और नए कनेक्शन के परिसरों का निरीक्षण हुआ था या नहीं।
- निरीक्षण रिपोर्ट किस तारीख को बनाई गई और उसमें क्या निष्कर्ष दर्ज किए गए।
- नए कनेक्शन की तकनीकी स्वीकृति या अनुशंसा किस अधिकारी ने की।
- क्या पुराने कनेक्शन और बकाये से संबंधित जानकारी उपलब्ध थी।
- क्या संबंधित परिसर में पहले से विद्युत संयोजन होने का उल्लेख आवेदन या निरीक्षण रिकॉर्ड में था।
यदि जांच में यह सामने आता है कि आवश्यक निरीक्षण नहीं हुआ, रिपोर्ट में गलत जानकारी दी गई या निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन किया गया, तो संबंधित अधिकारी की भूमिका और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
लेकिन यदि अवर अभियंता की भूमिका केवल तकनीकी निरीक्षण तक सीमित थी और कनेक्शन स्वीकृति किसी दूसरे अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में आती थी, तो जिम्मेदारी भी उसी अनुपात में निर्धारित होनी चाहिए।
उपखंड अधिकारी (SDO) और अधिशासी अभियंता की भूमिका: कनेक्शन और राजस्व पर नियंत्रण
उपखंड अधिकारी और अधिशासी अभियंता की जिम्मेदारियां उनके अधिकार क्षेत्र, कार्य आवंटन और लागू नियमों पर निर्भर करती हैं। नए कनेक्शनों की स्वीकृति, उपभोक्ता शिकायतों का निस्तारण, राजस्व समीक्षा और अधीनस्थ कर्मचारियों की निगरानी में उनकी भूमिका हो सकती है।
छतारी प्रकरण में इन अधिकारियों से यह स्पष्ट कराया जाना चाहिए कि:
- नए कनेक्शन जारी करने से पहले पुराने खातों की स्थिति जांचने की व्यवस्था क्या थी।
- संबंधित कनेक्शनों की स्वीकृति किस स्तर पर हुई।
- पुराने बकाये की वसूली के लिए कितनी बार नोटिस, भुगतान मांग या अन्य वैधानिक कार्रवाई की गई।
- बिजली चोरी के मामले में जारी डिमांड नोटिस की वर्तमान स्थिति क्या है।
- क्या संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध पहले कोई शिकायत प्राप्त हुई थी और यदि हुई, तो उस पर क्या कार्रवाई की गई।
- पुराने खातों पर बकाया रहने के बावजूद नए कनेक्शन जारी होने के कारणों की समीक्षा किसने की।
यदि अधिकारियों के पास प्रासंगिक जानकारी थी और उन्होंने अपने निर्धारित दायित्वों का पालन नहीं किया, तो इसका परीक्षण विभागीय जांच में किया जाना चाहिए। दूसरी ओर, केवल पद पर तैनात होने से किसी अधिकारी की मिलीभगत सिद्ध नहीं होती; उसके निर्णय, रिकॉर्ड और वास्तविक अधिकारों की जांच जरूरी है।
राजस्व विभाग की भूमिका: पुराने बकाये का हिसाब कहां है?
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष बिजली विभाग के राजस्व की वास्तविक स्थिति है। शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए 18 पुराने खातों की सूची में दर्ज बकाये का गणितीय योग ₹18,38,394 है। यह शिकायत में दी गई राशियों का जोड़ है, प्रमाणित विभागीय बकाया नहीं। नफीस खान के खाते में अलग-अलग राशि दर्ज होने के कारण कुल राशि की पुष्टि भी आवश्यक है।
इसके अतिरिक्त, कुछ नए खातों पर ₹2,413, ₹4,914, ₹5,658, ₹8,834, ₹1,799 और ₹292 जैसे बकाये बताए गए हैं। कुछ नए कनेक्शनों के बारे में बकाया जमा होने का दावा किया गया है, जबकि कई खातों की वर्तमान राशि उपलब्ध नहीं है।
राजस्व विभाग को प्रत्येक खाते का अद्यतन लेजर तैयार कर निम्न जानकारी देनी चाहिए:
| जांच का विषय | विभाग से अपेक्षित जानकारी |
|---|---|
| पुराना बकाया | मूल बिल, ब्याज/अन्य देय राशि और वर्तमान शेष |
| भुगतान | जमा हुई राशि, भुगतान की तारीख और रसीद |
| कनेक्शन की स्थिति | चालू, विच्छेदित, स्थायी रूप से बंद या अन्य स्थिति |
| बिजली चोरी | केस संख्या, डिमांड नोटिस और वसूली की स्थिति |
| नया कनेक्शन | आवेदन, स्वीकृति, परिसर और उपभोक्ता संबंधी रिकॉर्ड |
| वसूली कार्रवाई | नोटिस, वसूली प्रयास और वर्तमान स्थिति |
इस प्रक्रिया से स्पष्ट होगा कि वास्तविक रूप से कितना राजस्व लंबित है, कितना जमा हुआ है और किन खातों में आगे कार्रवाई आवश्यक है।
बकाये की सूची बनाना एक बात है; उसका वास्तविक हिसाब मिलाना और वसूली सुनिश्चित करना दूसरी। विभाग को दोनों का प्रमाणित विवरण देना चाहिए।
लाखों का बकाया: वसूली कौन करेगा?
इन मामलों में पुराने खातों पर भारी बकाया बताया गया है। यदि जांच में यह सामने आता है कि पुराने कनेक्शन के बकाये की अनदेखी करके नियमों के विपरीत नए कनेक्शन जारी किए गए, तो यह विभागीय राजस्व वसूली और जवाबदेही का गंभीर विषय होगा।
लेकिन यहां एक और अहम बात है: सिर्फ एक ही परिवार के सदस्य के नाम पर नया कनेक्शन होने से अपने-आप नियमों का उल्लंघन सिद्ध नहीं होता। यह देखना होगा कि परिसर वही है या अलग, पुराने कनेक्शन की स्थिति क्या थी, उपभोक्ता की पहचान और स्वामित्व संबंधी दस्तावेज क्या हैं तथा लागू नियमों के तहत नया कनेक्शन जारी करना उचित था या नहीं।
यदि किसी कर्मचारी ने नियमों को दरकिनार कर कनेक्शन दिलाया है, तो केवल उपभोक्ता पर कार्रवाई करके मामला समाप्त नहीं होना चाहिए। संबंधित कर्मचारी और स्वीकृति देने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।
मुख्य अभियंता की भूमिका: निगरानी, समीक्षा और जवाबदेही
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा प्रशासनिक सवाल मुख्य अभियंता और संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था को लेकर है।
क्या वरिष्ठ अधिकारियों को इन कथित बकायों और नए कनेक्शनों की जानकारी है? क्या छतारी टाउन उपकेंद्र के कनेक्शन रिकॉर्ड, बिलिंग हिस्ट्री और राजस्व वसूली की कभी विशेष जांच हुई? यदि शिकायत पहले से दी गई है, तो उस पर क्या कार्रवाई हुई? और यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो देरी का कारण क्या है?
मुख्य अभियंता की चुप्पी का आरोप तभी दूर होगा, जब विभाग रिकॉर्ड के आधार पर जवाब देगा। इस मामले में संबंधित अधिकारियों से यह अपेक्षा है कि वे शिकायत को गंभीरता से लें, निष्पक्ष जांच कराएं और कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक करें।
मुख्य अभियंता की सटीक जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक व्यवस्था, अधिकार प्रत्यायोजन और शिकायत प्राप्त होने की स्थिति पर निर्भर करेगी। इसलिए यह दावा करना उचित नहीं होगा कि उन्हें पहले से सभी खातों की जानकारी थी या उन्होंने जानबूझकर कार्रवाई नहीं की। लेकिन इतने खातों और गंभीर आरोपों वाली शिकायत पर सक्षम अधिकारियों को रिकॉर्ड आधारित समीक्षा करनी चाहिए।
यह रिपोर्ट किसी अधिकारी की दोषसिद्धि घोषित नहीं करती। हालांकि, इतने गंभीर आरोपों के बाद रिकॉर्ड की जांच और स्पष्ट जवाबदेही की मांग पूरी तरह जायज है।
मुख्य अभियंता से निम्न सवालों के जवाब मांगे जाने चाहिए:
- क्या छतारी टाउन उपकेंद्र से संबंधित खातों की विशेष जांच के आदेश दिए गए हैं?
- क्या पुराने और नए कनेक्शनों की सूची का बिलिंग रिकॉर्ड से मिलान कराया गया है?
- क्या संबंधित संविदाकर्मियों, JE, SDO और अधिशासी अभियंता की भूमिका अलग-अलग जांची जा रही है?
- क्या लंबे समय से एक ही उपकेंद्र पर तैनाती की समीक्षा की गई है?
- पुराने बकाये की वसूली के लिए समयबद्ध कार्ययोजना क्या है?
- क्या जांच के निष्कर्ष और कार्रवाई की स्थिति शिकायतकर्ता को लिखित रूप में उपलब्ध कराई जाएगी?
मुख्य अभियंता की खामोशी पर सवाल तभी तथ्यात्मक रूप से तय हो सकेगा, जब यह स्पष्ट हो कि शिकायत कब प्राप्त हुई, किस स्तर पर भेजी गई और उसके बाद क्या कार्रवाई हुई। यही रिकॉर्ड जवाबदेही का वास्तविक आधार होगा।
लंबे समय तक एक ही उपकेंद्र पर तैनाती: क्या विशेष समीक्षा जरूरी है?
शिकायतकर्ता का दावा है कि कुंवर हरेंद्र सिंह लगभग 12 वर्षों और शाहिद खां लगभग 15 वर्षों से छतारी टाउन उपकेंद्र से जुड़े रहे हैं। इन अवधियों की पुष्टि सेवा और तैनाती रिकॉर्ड से की जानी चाहिए।
एक ही स्थान पर लंबे समय तक तैनाती अपने-आप में अनियमितता या भ्रष्टाचार का प्रमाण नहीं है। फिर भी, जहां एक ही कर्मचारी के विरुद्ध बार-बार शिकायतें हों या उसके कार्यक्षेत्र से संबंधित अनियमितताओं के आरोप सामने आएं, वहां विभागीय प्रशासन को तैनाती, कार्य आवंटन और पर्यवेक्षण की समीक्षा करनी चाहिए।
समीक्षा में यह देखा जा सकता है कि:
- कर्मचारी की तैनाती और स्थानांतरण के आदेश क्या हैं।
- संबंधित उपकेंद्र पर कार्य आवंटन किस प्रकार किया गया।
- क्या शिकायतों के बाद कोई निरीक्षण या पर्यवेक्षण बढ़ाया गया।
- क्या हितों के टकराव या अनुचित प्रभाव की आशंका की जांच आवश्यक है।
- क्या लागू स्थानांतरण नीति और संविदा शर्तों का पालन हुआ।
यदि किसी नियम का उल्लंघन पाया जाता है, तो उसी के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
समाधान का रास्ता: शिकायत से कार्रवाई तक क्या होना चाहिए?
इस मामले का समाधान आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि व्यवस्थित जांच और प्रमाणित रिकॉर्ड से निकलेगा। PVVNL प्रबंधन को निम्न कदम उठाने चाहिए।
पहला चरण—शिकायत का औपचारिक पंजीकरण: शिकायत की प्राप्ति संख्या, तारीख, संबंधित अधिकारी और जांच की समय-सीमा निर्धारित की जाए।
दूसरा चरण—खातों का मिलान: पुराने और नए खातों के बिलिंग लेजर, भुगतान इतिहास, कनेक्शन आवेदन और परिसर विवरण का सत्यापन किया जाए।
तीसरा चरण—भूमिका निर्धारण: लाइनमैन, तकनीकी निरीक्षण करने वाले कर्मचारी, स्वीकृति देने वाले अधिकारी और राजस्व विभाग की जिम्मेदारी अलग-अलग निर्धारित की जाए।
चौथा चरण—पक्ष सुनना: जिन कर्मचारियों और उपभोक्ताओं के नाम शिकायत में हैं, उनसे दस्तावेज सहित जवाब लिया जाए और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।
पांचवां चरण—बकाये की वसूली: वास्तविक बकाया निर्धारित कर लागू नियमों के अनुसार वसूली की कार्रवाई की जाए। जहां विवाद हो, वहां उसका कारण और निस्तारण रिकॉर्ड में दर्ज हो।
छठा चरण—कार्रवाई रिपोर्ट: जांच पूरी होने पर शिकायतकर्ता को निष्कर्ष, वसूली की स्थिति और नियमानुसार की गई कार्रवाई की जानकारी दी जाए। व्यक्तिगत जानकारी का खुलासा लागू गोपनीयता नियमों के अनुसार ही किया जाए।
UPPCL MEDIA के सीधे सवाल
- पुराने खातों पर लाखों रुपये के कथित बकाये के बावजूद नए कनेक्शन किस आधार पर जारी किए गए?
- क्या संबंधित लाइनमैन ने कनेक्शन प्रक्रिया में भूमिका निभाई थी, या स्वीकृति किसी अन्य अधिकारी ने दी?
- क्या JE, SDO और अधिशासी अभियंता ने अपने निर्धारित दायित्वों का पालन किया?
- पुराने बकाये और बिजली चोरी के डिमांड नोटिस की वर्तमान स्थिति क्या है?
- क्या मुख्य अभियंता ने शिकायत की समीक्षा की है? यदि हां, तो अब तक क्या कार्रवाई हुई?
- क्या PVVNL प्रबंधन सभी खातों की जांच कर प्रमाणित बकाया और वसूली का विवरण सामने रखेगा?
कार्रवाई केवल नाम देखकर नहीं, साक्ष्य और जिम्मेदारी देखकर हो
छतारी टाउन उपकेंद्र से जुड़े मामलों में गंभीर आरोप उठाए गए हैं। इनका जवाब केवल यह कहकर नहीं दिया जा सकता कि मामला उपभोक्ता और लाइनमैन के बीच का है। कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया, पुराने बकाये की स्थिति, तकनीकी सत्यापन, राजस्व वसूली और अधिकारियों की निगरानी—सभी पहलुओं का परीक्षण जरूरी है।
यदि जांच में संविदाकर्मी की भूमिका प्रमाणित होती है, तो उसके विरुद्ध लागू सेवा शर्तों के अनुसार कार्रवाई हो। यदि किसी विभागीय अधिकारी ने निर्धारित दायित्वों की अनदेखी की है, तो उसकी जवाबदेही भी तय की जाए। और यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते, तो विभाग रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट करे।
UPPCL MEDIA का सवाल—क्या छतारी उपकेंद्र के मामले में जांच केवल संविदाकर्मी तक सीमित रहेगी, या पुराने बकाये, नए कनेक्शनों, राजस्व वसूली और स्वीकृति देने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होगी? मुख्य अभियंता और PVVNL प्रबंधन को अब रिकॉर्ड के साथ जवाब देना चाहिए।
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संपादकीय नोट: यह रिपोर्ट शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरण पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और विभागीय अभिलेखों का सत्यापन बाकी है। संबंधित संविदाकर्मियों, अधिकारियों, उपभोक्ताओं तथा PVVNL प्रबंधन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना चाहिए।
यदि कोई खबर शिकायत से संबंधित है तो, अभी तक का अपडेट
खबर प्रकाशित
20 Oct, 11:19 pm🔴 UPPCL MEDIA की विशेष पड़ताल छतारी बिजलीघर में बकाये और नए कनेक्शनों का मामला: संविदाकर्मी से लेकर मुख्य...
आगे की रिपोर्ट आने पर यहीं जुड़ेगी। अभी समाधान की पुष्टि नहीं हुई है।
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