बस्ती, 22 अगस्त। बस्ती जिला उपभोक्ता आयोग ने विद्युत विभाग के अधिकारियों द्वारा आयोग के आदेश की कथित तौर पर लगातार अवहेलना किए जाने को गंभीरता से लेते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने विद्युत वितरण खंड द्वितीय के अधिशासी अभियंता (EE) और भानपुर के उपखंड अधिकारी (SDO) को तीन-तीन महीने के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों अधिकारियों पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर दोनों को एक-एक महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
गलत बिलिंग से शुरू हुआ मामला
भानपुर निवासी मानवेंद्र सिंह, जो राहुल ऑटो मोबाइल के प्रोपराइटर हैं, ने अधिवक्ता संजीव कुमार भट्टाचार्य के माध्यम से वर्ष 2024 में जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया था।
उपभोक्ता के अनुसार, 9 जनवरी 2024 को मीटर और बिजली बिल में गड़बड़ी की शिकायत विभाग में दर्ज कराई गई थी। शिकायत के बावजूद विभाग की ओर से तीन महीने का करीब 59 हजार रुपये का बिल जारी किया गया, जिसे उपभोक्ता ने जमा कर दिया।
इसके बाद मई माह में 8,566 रुपये का बिल आया, लेकिन विभागीय पोर्टल पर बकाया राशि बढ़कर 62,143 रुपये दिखाई देने लगी। बिलिंग की इस विसंगति को लेकर उपभोक्ता ने न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की।
आयोग ने लगाया 1.20 लाख रुपये का हर्जाना
मामले की सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश अमर जीत वर्मा और सदस्य अजय प्रकाश सिंह की पीठ ने 1 जनवरी 2026 को आदेश पारित किया।
आयोग ने अप्रैल 2024 के बाद जारी किए गए गलत बिलों को निरस्त करने के साथ विद्युत विभाग पर 1,20,000 रुपये का हर्जाना लगाया और निर्धारित अवधि में राशि जमा करने का निर्देश दिया।
आदेश में यह भी प्रावधान किया गया कि निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।
आदेश का पालन नहीं करने पर बढ़ी कार्रवाई
बताया गया कि आयोग के आदेश का अनुपालन नहीं होने पर उपभोक्ता ने इजरा वाद तथा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 72 के तहत प्रकीर्ण वाद दाखिल किया।
मामले में आयोग ने दोनों अधिकारियों के विरुद्ध जमानती वारंट भी जारी किया। इसके बावजूद अधिकारियों की ओर से अपेक्षित अनुपालन और न्यायालय में उपस्थिति नहीं होने पर आयोग ने कड़ा रुख अपनाया।
आयोग ने अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए दोनों अधिकारियों को तीन-तीन महीने के कारावास और 25-25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
35 साल के इतिहास में पहली बार ऐसी कार्रवाई का दावा
इस फैसले को बस्ती जिला उपभोक्ता आयोग के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 1991 में स्थापना के बाद पहली बार अधिकारियों को इस तरह की सजा सुनाए जाने का दावा किया गया है।
फैसले के बाद विद्युत विभाग के अधिकारियों और प्रशासनिक महकमे में चर्चा तेज हो गई है। मामले में सुनवाई की अगली तारीख 20 अक्टूबर निर्धारित की गई है।
यूपीपीसीएल मीडिया की नजर में बड़ा सवाल
यह मामला केवल एक उपभोक्ता की बिलिंग समस्या तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि यदि उपभोक्ता आयोग द्वारा पारित आदेशों का भी समय पर अनुपालन नहीं होगा, तो आम उपभोक्ता अपने अधिकारों की रक्षा के लिए किस व्यवस्था पर भरोसा करेगा?
यूपीपीसीएल मीडिया की यह खबर विद्युत उपभोक्ताओं के अधिकारों और विभागीय जवाबदेही के मुद्दे को सामने लाती है।
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खबर प्रकाशित
23 Aug, 12:45 amबस्ती, 22 अगस्त। बस्ती जिला उपभोक्ता आयोग ने विद्युत विभाग के अधिकारियों द्वारा आयोग के आदेश की कथित तौर पर लग...
आगे की रिपोर्ट आने पर यहीं जुड़ेगी। अभी समाधान की पुष्टि नहीं हुई है।
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