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आईटी कैडर का ‘महाभारत’: एक साल तक सोता रहा सिस्टम, फिर 24 अभियंताओं का सामूहिक तबादला! आखिर UPPCL में चल क्या रहा है?

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जुलाई 2023 में बनी नीति, जून 2024 में जागा प्रशासन; आखिर UPPCL में आईटी कैडर के नाम पर क्या खेल चल रहा है?

आईटी कैडर या प्रशासनिक प्रयोगशाला? UPPCL के आदेशों ने खड़े किए कई गंभीर सवाल

लखनऊ | UPPCL MEDIA विशेष

उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) में आईटी कैडर को लेकर जारी आदेशों और उसके बाद हुई प्रशासनिक कार्रवाई ने एक बार फिर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दस्तावेज बताते हैं कि जुलाई 2023 में जिस आईटी कैडर को भविष्य की डिजिटल बिजली व्यवस्था की रीढ़ बताया गया था, वही व्यवस्था लगभग एक साल तक फाइलों में धूल फांकती रही। उपलब्ध दस्तावेजों से यह संकेत मिलता है कि एक ओर आईटी स्ट्रक्चर के गठन के समय अभियंताओं को विकल्प (Option) देने की बात कही गई, वहीं दूसरी ओर बाद में कई अभियंताओं को बिना विकल्प लिए ही आईटी इकाई में संबद्ध करने और स्थानांतरित करने की कार्रवाई की गई। फिर अचानक जून 2024 में 24 अभियंताओं का सामूहिक स्थानांतरण कर प्रशासन ने ऐसा संदेश दिया मानो कोई बड़ी आपात स्थिति उत्पन्न हो गई हो।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि आईटी कैडर इतना महत्वपूर्ण था तो उसे लागू करने में पूरे 12 महीने क्यों लग गए? आखिर निगम अपने ही आदेशों का पालन कर रहा है या उनका उल्लंघन?

क्या आदेश जारी करके भूल गया था प्रबंधन?

24 जुलाई 2023 को आईटी संवर्ग की विस्तृत संरचना घोषित की गई। इसमें ERP, GIS, साइबर सिक्योरिटी, RT-DAS, वेब पोर्टल, नेटवर्किंग और डेटा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए अलग कैडर बनाया गया।

लेकिन इसके बाद पूरा एक साल बीत गया।

  • न कोई बड़ी तैनाती हुई,
  • न कोई व्यापक पुनर्गठन,
  • न कोई जवाबदेही तय हुई।

क्या यह आदेश केवल फाइलों की शोभा बढ़ाने के लिए जारी किया गया था?

एक आदेश में विकल्प, दूसरे में सीधे स्थानांतरण

24 जुलाई 2023 को जारी आदेश में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख किया गया था कि कंप्यूटर साइंस एवं सूचना प्रौद्योगिकी पृष्ठभूमि वाले अभियंताओं से आईटी कैडर में शामिल होने अथवा नए आईटी संवर्ग में जाने के लिए विकल्प मांगा जाएगा। लेकिन इसके बाद 30 जून 2024 को जारी आदेश के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के अभियंताओं को बिना विकल्प प्रक्रिया सार्वजनिक किए सीधे आईटी इकाई में स्थानांतरित कर दिया गया।

यदि विकल्प लेना अनिवार्य था तो क्या वास्तव में सभी अभियंताओं से विकल्प लिया गया? यदि नहीं लिया गया तो फिर आदेश संख्या 1616 का क्या हुआ?

एक साल तक फाइलों में क्यों पड़ा रहा आईटी स्ट्रक्चर?

दस्तावेज बताते हैं कि जुलाई 2023 में आईटी स्ट्रक्चर लागू करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन लगभग एक वर्ष तक यह व्यवस्था जमीनी स्तर पर लागू नहीं हो सकी। इसके बाद अचानक जून और जुलाई 2024 में आदेशों की श्रृंखला जारी हुई और अभियंताओं को आईटी इकाइयों में भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

  • सवाल उठता है कि यदि आईटी स्ट्रक्चर इतना आवश्यक था तो उसे लागू करने में एक साल की देरी क्यों हुई?
  • क्या जिम्मेदार अधिकारियों से कभी जवाब मांगा गया?

फिर अचानक 24 अभियंताओं को क्यों हटाया गया?

30 जून 2024 को अचानक 24 सहायक अभियंताओं का सामूहिक स्थानांतरण कर उन्हें आईटी इकाइयों में भेज दिया गया। इसके ठीक आठ दिन बाद तत्कालीन प्रबंध निदेशक ने सभी डिस्कॉम एमडी को पत्र लिखकर कहा कि आईटी बैकग्राउंड वाले अभियंताओं को गैर-आईटी कार्यों से हटाकर आईटी कार्यों में लगाया जाए।

अब सबसे बड़ा सवाल उठता है—

यदि वर्षों से आईटी अभियंता गैर-आईटी काम कर रहे थे तो यह जानकारी प्रबंधन को पहले क्यों नहीं थी?

और यदि थी, तो कार्रवाई में एक साल की देरी क्यों हुई?

क्या विकल्प लेने की प्रक्रिया पूरी हुई थी?

आईटी संवर्ग गठन के समय अभियंताओं को विकल्प देने और संवर्ग परिवर्तन की प्रक्रिया निर्धारित करने का दावा किया गया था।

लेकिन कर्मचारियों के बीच चर्चा है—

✔ क्या सभी पात्र अभियंताओं से वास्तव में विकल्प लिया गया?

✔ क्या सभी को समान अवसर मिला?

✔ क्या चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी थी?

✔ क्या कुछ लोगों को विशेष लाभ पहुंचाया गया?

यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ तो पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती?

करोड़ों की भर्ती, लेकिन काम रिपोर्टिंग का!

  • एमडी के पत्र में स्वयं स्वीकार किया गया कि आईटी पृष्ठभूमि वाले अभियंताओं से खरीद, स्टोर, टेस्टिंग, वितरण और सामान्य प्रशासनिक कार्य लिए जा रहे थे।
  • यानी जिन अभियंताओं को डिजिटल परिवर्तन के लिए भर्ती किया गया, वे वर्षों तक गैर-आईटी कार्यों में लगे रहे।
  • यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि मानव संसाधन प्रबंधन की गंभीर विफलता मानी जा सकती है।

फील्ड में अभियंताओं की कमी, मुख्यालय में आईटी की भीड़?

बिजली वितरण व्यवस्था पहले से ही तकनीकी कर्मचारियों की कमी से जूझ रही है। उपभोक्ता शिकायतों, फॉल्ट निस्तारण, लाइन हानि नियंत्रण और आपूर्ति प्रबंधन जैसे कार्यों के लिए अनुभवी अभियंताओं की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है।

ऐसे में बड़ी संख्या में अभियंताओं को आईटी इकाइयों में संबद्ध किए जाने से यह प्रश्न भी उठ रहा है कि क्या निगम फील्ड की वास्तविक जरूरतों को नजरअंदाज कर रहा है?

  • वर्तमान समय में प्रदेश के कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति, फॉल्ट निस्तारण, लाइन लॉस नियंत्रण और उपभोक्ता शिकायतों के समाधान जैसी गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं।
  • ऐसे में कर्मचारी संगठनों का दावा है कि लगभग 150 अभियंता विभिन्न आईटी परियोजनाओं के नाम पर मुख्यालय या केंद्रीय इकाइयों से संबद्ध हैं।
  • जबकि दूसरी ओर वितरण क्षेत्रों में तकनीकी स्टाफ की कमी लगातार बताई जा रही है।

तो सवाल यह भी है—

क्या आईटी परियोजनाओं के नाम पर फील्ड से तकनीकी जनशक्ति खींची जा रही है?

क्या यह नियमों से ऊपर प्रशासनिक सुविधा है?

दस्तावेजों में यह भी उल्लेख है कि कुछ अभियंताओं को पहले एक स्थान से हटाया गया और कुछ महीनों बाद पुनः आईटी इकाई में बुला लिया गया। यदि आईटी इकाई को वास्तव में इन अभियंताओं की आवश्यकता थी तो उन्हें पहले हटाया क्यों गया? और यदि आवश्यकता नहीं थी तो बाद में वापस क्यों बुलाया गया?

यह स्थिति प्रशासनिक योजना की कमजोरी को दर्शाती है या फिर निर्णय प्रक्रिया में गंभीर असंगति को?

ऊर्जा मंत्री से पूछे जा रहे 5 बड़े सवाल

  • वर्तमान आईटी स्ट्रक्चर किस नियम और स्वीकृति के तहत लागू किया गया?
  • आईटी अभियंताओं के स्थानांतरण का वास्तविक अधिकार किसके पास है?
  • आदेशों की अनदेखी करने वालों पर क्या कार्रवाई हुई?
  • क्या आईटी कैडर को लेकर दोहरी नीति अपनाई गई?
  • विकल्प लेने की प्रक्रिया कितने अभियंताओं पर लागू हुई?
  • बिना विकल्प स्थानांतरण का अधिकार किस नियम के तहत प्रयोग किया गया?
  • जुलाई 2023 से जुलाई 2024 तक आईटी स्ट्रक्चर लागू न होने के लिए कौन जिम्मेदार है?
  • क्या निगम के भीतर आईटी कैडर को लेकर अलग-अलग नियम लागू किए गए?

UPPCL MEDIA का अहम सवाल -

यदि आईटी कैडर इतना आवश्यक था तो एक साल तक उसे ठंडे बस्ते में किसने रखा?

  • यदि आदेश लागू नहीं हुए तो जिम्मेदार कौन है?
  • यदि अभियंता गलत जगह तैनात थे तो उनकी तैनाती कराने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  • जब एक ही विषय पर जारी आदेश अलग-अलग दिशा में संकेत देते दिखाई दें, तब भ्रम पैदा होना स्वाभाविक है।
  • क्या आईटी कैडर वास्तव में तकनीकी आवश्यकता के आधार पर संचालित हो रहा है या फिर प्रशासनिक प्रयोग का माध्यम बन गया है?जब तक निगम इन सवालों का तथ्यात्मक और सार्वजनिक जवाब नहीं देता, तब तक आईटी कैडर का यह विवाद केवल स्थानांतरण का मामला नहीं बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासनिक विश्वसनीयता का प्रश्न बना रहेगा।

और सबसे महत्वपूर्ण—

क्या 24 अभियंताओं का सामूहिक स्थानांतरण वास्तव में प्रशासनिक आवश्यकता था, या फिर बीते एक वर्ष की नीतिगत विफलताओं पर पर्दा डालने की कोशिश?

जब तक इन सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं मिलता, तब तक UPPCL का आईटी कैडर विवाद केवल एक स्थानांतरण मामला नहीं, बल्कि पूरे निगम की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और जवाबदेही पर खड़ा एक बड़ा प्रश्नचिह्न बना रहेगा।

खबर से आगे, जवाब तक

यदि कोई खबर शिकायत से संबंधित है तो, अभी तक का अपडेट

खबर प्रकाशित

4 Jun, 06:57 pm

जुलाई 2023 में बनी नीति, जून 2024 में जागा प्रशासन; आखिर UPPCL में आईटी कैडर के नाम पर क्या खेल चल रहा है?...

आगे की रिपोर्ट आने पर यहीं जुड़ेगी। अभी समाधान की पुष्टि नहीं हुई है।

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